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परिवार का सहारा: दिन-रात मेहनत करने वाले की कहानी |
एक छोटे से गाँव में रमेश नाम का एक युवक रहता था। रमेश बहुत ही मेहनती और ईमानदार था। वह अपने परिवार के लिए दिन-रात मेहनत करता था। उसके परिवार में उसकी बूढ़ी माँ, उसकी पत्नी सीमा और उसकी छोटी बेटी पायल थीं।
रमेश का सपना था कि उसकी बेटी पायल एक दिन पढ़-लिखकर बड़ी अफसर बने। लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि वह पायल को अच्छी शिक्षा दिला सके। फिर भी, रमेश ने हार नहीं मानी और दिन-रात मेहनत कर पैसे जमा करने लगा।
एक दिन रमेश को पता चला कि उसके गाँव के पास एक बड़ा कारखाना खुलने वाला है जहाँ बहुत सारे मजदूरों की जरूरत होगी। रमेश ने वहाँ नौकरी के लिए आवेदन किया और उसकी मेहनत और ईमानदारी की वजह से उसे नौकरी मिल गई। अब रमेश को यकीन था कि वह अपनी बेटी के लिए अच्छे स्कूल की फीस जमा कर सकेगा।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। एक दिन कारखाने में काम करते समय रमेश का हाथ मशीन में फंस गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। डॉक्टरों ने कहा कि रमेश को अब आराम की जरूरत है और वह अब काम नहीं कर पाएगा।
यह सुनकर रमेश की दुनिया ही उजड़ गई। उसकी आँखों के सामने उसकी बेटी का सपना टूटता हुआ दिखाई देने लगा। उसकी माँ और पत्नी भी बहुत दुखी थीं। रमेश ने अपने आप को बहुत हताश और निराश महसूस किया।
फिर एक दिन, पायल ने अपने पिता से कहा, "पापा, मुझे आपकी हालत का पता है। मैं अब से और भी मेहनत करूंगी और एक दिन आपके सपने को पूरा करूंगी। आप चिंता मत करो, मैं आपके सपने को जीऊंगी।"
पायल के शब्दों ने रमेश के दिल को छू लिया। उसने अपनी बेटी की आँखों में दृढ़ निश्चय देखा और उसे अपनी ताकत मिल गई। रमेश ने फिर से उम्मीद की किरण देखी और अपने आप को हिम्मत दी।
समय बीतता गया और पायल ने अपनी मेहनत से गाँव के स्कूल में टॉप किया। उसे एक अच्छे कॉलेज में दाखिला मिला और उसने वहाँ भी अपनी मेहनत से नाम कमाया। पायल ने आखिरकार अपने पिता के सपने को सच कर दिखाया और एक बड़ी अफसर बन गई।
रमेश की आँखों में गर्व के आँसू थे। उसने महसूस किया कि उसकी मेहनत और उसकी बेटी की लगन ने मिलकर उनके सपने को पूरा कर दिया। उसकी बेटी पायल ने साबित कर दिया कि सपनों को पूरा करने के लिए सिर्फ मेहनत और हिम्मत की जरूरत होती है।
इस तरह, रमेश और उसका परिवार फिर से खुशहाल जीवन जीने लगे और पायल अपने पिता का गर्व बन गई।


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