एक छोटे से गाँव में एक इमली का पेड़ था।

एक छोटे से गाँव में एक इमली का पेड़ था।

एक छोटे से गाँव में एक इमली का पेड़ था


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एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में एक इमली का पेड़ था। उस पेड़ पर एक छोटा सा घोंसला था जिसमें चुटकी नाम की एक नन्ही चिड़िया रहती थी। चुटकी बहुत खुशमिजाज और प्यारी थी। वह हर सुबह उठकर मीठे-मीठे गीत गाया करती थी, जिससे गाँव के लोग बहुत खुश होते थे।

गाँव में एक बूढ़ा किसान था जिसका नाम रामू था। रामू बहुत मेहनती और दयालु था। वह रोज इमली के पेड़ के नीचे बैठकर आराम करता और चुटकी के गाने सुनता। एक दिन, जब रामू पेड़ के नीचे बैठा था, उसने देखा कि चुटकी बहुत परेशान है। उसने पूछा, "क्या बात है चुटकी? तुम इतनी उदास क्यों हो?"


चुकी ने कहा, "रामू काका, मेरी एक समस्या है। मेरे घोंसले में रहने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है और बरसात का मौसम भी आने वाला है। मुझे डर है कि मेरा घोंसला टूट जाएगा।"

रामू ने सोचा और कहा, "चिंता मत करो, मैं तुम्हारी मदद करूंगा।" रामू ने गाँव के बच्चों को बुलाया और उनसे कहा, "हम सब मिलकर चुटकी के लिए एक बड़ा और मजबूत घोंसला बनाएंगे।"

सभी बच्चे उत्साहित हो गए और उन्होंने लकड़ियाँ, पत्तियाँ और धागे इकठ्ठा करना शुरू कर दिया। रामू ने बच्चों को सिखाया कि कैसे एक मजबूत घोंसला बनाया जाता है। सबने मिलकर मेहनत की और आखिरकार एक बड़ा और सुंदर घोंसला बना दिया।

चुटकी बहुत खुश हुई और उसने सभी को धन्यवाद दिया। उसने नया घोंसला देखा और उसमें आराम से बैठ गई। अब वह निश्चिंत होकर बारिश का इंतजार कर सकती थी।

कुछ दिनों बाद बारिश आई। चुटकी का घोंसला बिल्कुल सुरक्षित रहा। रामू और गाँव के बच्चे बहुत खुश हुए। चुटकी ने खुशी-खुशी अपने मीठे गीत गाए, जिसे सुनकर सबका दिल बाग-बाग हो गया।

इस तरह, चुटकी और गाँव के लोगों ने मिलकर यह साबित किया कि अगर हम सब मिलकर एक-दूसरे की मदद करें तो हर समस्या का हल निकल सकता है।


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