आशा की किरण
बचपन में रमेश एक छोटे से गांव में रहता था। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। उसके पिता एक मजदूर थे और माता घरेलू काम करती थीं। घर की स्थिति ऐसी थी कि कभी-कभी खाना भी पूरा नहीं मिलता था। लेकिन रमेश के दिल में एक सपना था—वह एक दिन बड़ा इंजीनियर बनेगा और अपने परिवार की हालत सुधारेगा।
रमेश ने गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाई शुरू की। स्कूल की हालत ठीक नहीं थी, किताबें पुरानी थीं और शिक्षक भी नियमित नहीं आते थे। लेकिन रमेश ने इन सब मुश्किलों को अपने सपने के रास्ते में रुकावट नहीं बनने दिया। वह अपने दोस्तों से किताबें उधार लेता, खुद से पढ़ता और अपनी पढ़ाई में मन लगाता।
एक दिन गांव में एक एनजीओ के लोग आए। उन्होंने गांव के होनहार बच्चों की मदद के लिए एक योजना शुरू की। रमेश का नाम भी उन बच्चों में शामिल हुआ। एनजीओ ने उसे एक छात्रवृत्ति दी जिससे वह शहर में जाकर अच्छे स्कूल में पढ़ाई कर सके।
शहर में रमेश ने पूरी मेहनत से पढ़ाई की। उसे कई नई चीजें सीखने को मिलीं और उसकी ज्ञान की सीमा बढ़ी। उसने हर परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी मेहनत से सभी का दिल जीत लिया। अंततः उसने इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा पास कर ली और एक प्रतिष्ठित कॉलेज में दाखिला पाया।
कॉलेज में भी रमेश ने कड़ी मेहनत की और हर सेमेस्टर में टॉप किया। उसकी मेहनत और लगन का परिणाम यह हुआ कि उसे एक बड़ी कंपनी में नौकरी मिल गई। नौकरी मिलने के बाद उसने अपने परिवार को शहर बुलाया, एक अच्छा घर लिया और उनके सारे कर्ज चुकाए।
रमेश की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि परिस्थिति कैसी भी हो, अगर हमारे मन में सच्ची लगन और मेहनत करने की इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। रमेश ने अपनी मेहनत से अपनी और अपने परिवार की जिंदगी बदल दी।
यही है सच्ची प्रेरणा की कहानी।

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