संवेदनशीलता की कहानी


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 संवेदनशीलता की कहानी



गाँव के किनारे, एक छोटी सी खूबसूरत झील थी। झील के किनारे पर एक छोटा सा गाँव बसा था, जहाँ सभी लोग एक-दूसरे को जानते थे और मिल-जुलकर रहते थे। इस गाँव में एक छोटा सा बच्चा रहता था, जिसका नाम विक्रम था।


विक्रम एक बहुत ही संवेदनशील बच्चा था। उसका दिल बहुत ही कोमल था और वह हमेशा दूसरों के दर्द को समझने की कोशिश करता था। वह बड़े होते हुए एक अच्छा डॉक्टर बनने का सपना देखता था।


एक दिन, विक्रम के गाँव में एक गंभीर हादसा हो गया। एक बड़ी आग लग गई और कई घर जल गए। बहुत से लोग घायल हो गए और बच्चे भी खो गए। इस हादसे में विक्रम का दिल भी जलते घरों के लिए रोना आ गया।




विक्रम ने तत्काल सोचा कि उसे डॉक्टर बनने के लिए कुछ करना होगा। वह अपने आस-पास के लोगों की मदद करने का निर्णय लिया। उसने अपने दोस्तों को साथ बुलाया और उनके साथ मिलकर चोटी तक पहुँचने का निर्णय किया।


विक्रम ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर बचे हुए लोगों की मदद करना शुरू किया। वह घायलों को पहुँचाने में मदद की, बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने में सहायता की, और जो भी लोग जलते घरों से बचे थे, उन्हें उसने बेहतरीन चिकित्सा सेवा प्रदान की।


विक्रम ने जगह-जगह दवाईयों का वितरण किया, चोटी तक पहुँचकर इलाज किया, और सभी लोगों की चिकित्सा देखा। उसने अपने दिल की सुनी और संवेदनशीलता का परिचय किया।


विक्रम की इस अद्भुत कार्यशैली ने लोगों के दिलों में उम्मीद और आत्मविश्वास जगाया। उनका योगदान सभी की ज़िंदगी में एक नई किरण के समान था।


हादसे के बाद, लोगों ने विक्रम को अपना हीरो मान लिया। वह उनकी सेवा में जुट गया और अपने सपने को पूरा करने का संकल्प किया। उसने डॉक्टर बनने के सपने को हकीकत में बदल दिया और लोगों की सेवा में अपना जीवन अर्पित किया।


इस कहानी से हमें यह सिखने को म

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